Hindi

November 11, 2016
inkdriftaasannhihoga

आसां तो नही था…

जिंदगी जीने के लिए….मेहनत करना…. उनके लिए आसां तो नही था……. मन विचलित सा हो गया…उन बच्चों को देखकर…. सूरज की तपिश को सहते हुए…अपने नन्हे […]
December 5, 2016

अरे ए रुपैया ओ रुपैया

अरे ए रुपैया ओ रुपैया सबका मर्ज़ है ये भैया , खनक खनक ये करता है पाँव नहीं पर चलता है , सब जन का व्यव्हार […]
December 5, 2016

बेटियां

 || है मुझे ये विश्वास, एक दिन होगा आपको भी एहसास || बहुत ख़ूबसूरत, न जानें किस समाज की ओर हम बढ़ रह हैं || “दावा तो […]
December 5, 2016

कालिख

“यह कविता एक कटाक्ष है, हमारी उस मनोवृति क लिए जो हम सब को बस एक ही पैमाने पर तोलना चाहती है, एक रोष है उस […]